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भीलवाड़ा

पुण्यात्माओं को मिलता जीवन में संयम साधना का पथ अंगीकार करने का सौभाग्य- बाबेल

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राजस्थान सिंहनी यशस्वी महासाध्वी परम पूज्य यशकंवर महारासा की सुशिष्या परम पूजनीय साध्वीरत्न मधुकंवर महारासा के सानिध्य में पूजनीय साध्वीरत्न चिंतनश्री महारासा की 21वी दीक्षा जयंती कार्यक्रम जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की प्रांतीय अध्यक्ष ओर महारासा की दीक्षा धर्ममाता नीता बाबेल के विशिष्ट आतिथ्य में मनाया गया। कांचीपुरम में आयोजित समारोह में बाबेल ने कहा कि एक दिन पहले पूज्य मधुकंवर महारासा की 50वीं दीक्षा जंयति मनाई गई और आज पूज्य चिंतनश्री महारासा की दीक्षा जयंति मना रहे है। उन्होंने कहा कि जीवन में संयम साधना का पथ अंगीकार करने का सौभाग्य पुण्यात्माओं को मिलता है। हम खुशकिस्मत मानते है कि ऐसी पुण्यात्माओं का सान्निध्य पाने का अवसर मिलता रहा है। जब भी आपके सान्निध्य में आए हमेशा धर्म के पथ पर चलने और जिनशासन की सेवा करने की भावना मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि पूज्य चिंतनश्री महारासा की 27 जनवरी 2001 को हुई दीक्षा में धर्ममाता बनना जीवन मे सोभाग्य का पल रहा।इस बात से भी हमे हार्दिक प्रसन्नता महसूस होती है कि पूज्य चिंतनकंवर महारासा के संयम साधना के पथ पर अग्रसर होने के लिए आयोजित दीक्षा महोत्सव में हमारे परिवार ने भी धर्म प्रभावना का लाभ लिया। उन्होंने कहा कि पूज्य मधुकंवर महारासा की सेवा भावना लाखों भक्तों के लिए अनुकरणीय है। इस मौके पर जैन कॉन्फ्रेंस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजिया रानी डूंगरवाल, निर्मला बुलिया, सुनीता पिपाडा, गुणमाला जैन, हेमन्त कोठारी, अभय चपलोत भी मौजूद थे।

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